"Love in UKRAIN(conclude)" by Chandrasingh
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| Cover page |
"Love in UKRAIN: Conclude"
24 फरवरी 2022 को, रूस ने दक्षिण-पश्चिम में अपने पड़ोसी यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर आक्रमण शुरू किया, जो 2014 में शुरू हुए रूस-यूक्रेनी युद्ध की नाटकीय वृद्धि को चिह्नित करता है। आक्रमण लंबे समय तक रूसी सैन्य निर्माण से पहले हुआ था जो 2021 की शुरुआत में शुरू हुआ था, जिसके दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 1997 के बाद नाटो के विस्तार की सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में आलोचना की और मांग की क यूक्रेन को सैन्य गठबंधन में शामिल होने से कानूनी रूप से प्रतिबंधित किया जाए; उन्होंने अतार्किक विचार भी व्यक्त किए। आक्रमण के कुछ दिन पहले, रूस ने आधिकारिक तौर पर डोनेट्स्क पीपुल्स रिपब्लिक और लुहान्स्क पीपुल्स रिपब्लिक, पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में दो स्वयं घोषित राज्यों को मान्यता दी, और 21 फरवरी को क्षेत्रों में सैनिकों को भेजा। 22 फरवरी को, रूसी संघ परिषद ने सर्वसम्मति से राष्ट्रपति को रूस की सीमाओं के बाहर सैन्य बल का उपयोग करने के लिए अधिकृत किया। अपनी सेना इस डोमबास क्षेत्र से कीव की और बढ़ती गई। यहां पर यूक्रेनी प्रमुख वोलोदिमिर जेलेंस्की अपने देश को बचाने में जुटे थे। हॉटलाइन पे देर तक बाते चल रही थी। यूरोपियन यूनियन अपनी जिम्मेवारी से हट रहा था। यूएसए के बुड्ढे प्रमुख जो बाइडेनने, अफगानिस्तान के बाद यूक्रेन से मुंह मोड़ लिया था। यूएन की जनरल एसेंबली रशिया को रोकने के पैंतरे बना रही थी।
यूक्रेन में रूस के हमले के बीच वहां फंसे नागरिकों के लिए राहत भरी खबर आई। भारत सरकार उन्हें सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए विशेष अभियान चलाने जा रही था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में CCS (कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी) की बैठक में यह फैसला हुआ। सभी विशेष उड़ानों का खर्च सरकारी उठाएगी। यूक्रेन में हजारों की संख्या में मेडिकल स्टूडेंट्स और अन्य नागरिक फंसे हुए थे। टीवी रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि यूक्रेन से लगे पड़ोसी देशों में सड़क मार्ग के रास्ते भारतीय नागरिकों को पहुंचाया जाएगा। वहां से उन्हें प्लेन के जरिए स्वदेश लाया जाएगा। इस ऑपरेशन का नाम "ऑपरेशन गंगा" रखा गया। इसमें उन लोगों की सहायता शामिल है जो रोमानिया, हंगरी, पोलैंड, मोल्दोवा, स्लोवाकिया के पड़ोसी देशों में चले गए हैं।
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| ऑपरेशन गंगा: भारत सरकार |
26 फरवरी यूक्रेन से भारतीय नागरिकों को निकालने के ‘आपरेशन गंगा’ अभियान के पहले चरण के तहत रोमानिया से 219 भारतीयों के साथ दिल्लीकी उड़ान भारत पहुंची । विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को ट्वीट कर कहा, ‘‘ वापसी पर स्वागत है । अपरेशन गंगा का पहला चरण । ’’
इस फ्लाइटमें सभी खुश थे सिवा अमेया। फ्लाइट दिल्ली लैंड हुई। फ्लाइट का दरवाजा खुला। सभी प्रवासी की आंखों आंसू थे। "आखिर भारत मां ने हमे बचा लिया" भारत के नागरिक होने का गर्व करते, एक के बाद एक प्लेन की सीढ़ियां उतरने लगे। सबसे पहले अमेया थी। अपने मातापिता को देख रोती हुई दौड़ी। उसके मनमें शायद अभी भी डर भरा हुआ था।
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| प्रतीकात्मक चित्र: अमेय |
वे जल्दी से मीडिया कवच तोड़ अड्डे से बाहर निकल गए।
ओला टैक्सी तैयार थी। थोड़ी ही देर में घर पहुंच गए। अमेया के पिताजी प्राइवेट कंपनी में जॉब कर रहे थे। सफरमे अमेया रोती ही रही; अपनी मां की गोदमे। अमेया ने मौतको करीब से देखी थी इसीलिए बहोत डरी हुई थी।
सुबह के नौ बज रहे है। अमेया फ्रेश होके सोफे पर बैठी है।
"ले, बेटा! गरमागरम चाय पी ले।" बनावटी हसीं के साथ। क्योंकि बेटी की चिंताने कई राते जगाई थी। अब बेटी आ गई हैं लेकिन पहले जैसी नहीं रही, यूक्रेन मैं कुछ तो ऐसा हुआ था जिसके सदमे से आजभी गुमशुदा थी।
"तेरे सभी फ्रेंड्स आ गए?" मां ने बात शुरू की।
"ना।"
"तो?"
"एक के सिवा सभी आ गए।"
"क्या? क... कौन?"
"रोकी।" "पुष्पराज ठाकुर"।
"रोकी, क्यों नही आया?" मां बेटी की बात काटकर पिता बोले।
अमेया गहरी सांस लेके बोली, "मेरा रोकी अब नही लौटेगा।" "उसने यूक्रेन आर्मी ज्वाइन करली है।"
"मुझे तुम विस्तार से बताओ, यूक्रेनमे क्या हो रहा है" माता उत्साह से बोली।
अमेया,
"यूक्रेन यूरोपका सबसे प्यारा देश था। भारत के साथ साथ सभी साउथ ईस्ट और अफ्रीका देश के बच्चे यहां पढ़ने आते थे। दुनियामे सबसे सस्ता मेडिकल एजुकेशन यूक्रेन की विशेषता थी। सभी खुश थे। खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में हमारी पहली मुलाकात हुई। मैं फर्स्ट यर में थी और वो सेकंड। पुष्पराज लंबे बाल,लंबी दाढ़ी, ऊंचा कद, और जोशीलेपन से सभी दोस्तों में "रॉकी" कहलाता था।
एकबार लाइब्रेरी मैं पढ़ रही थी। दो पाकिस्तानी विद्यार्थी क्रिकेट की बाते कर रहे थे,
"धूल चटा दी ना हिंदुस्तानवालो को? मोदीभक्त सारे।"
शायद वे T20 वर्ल्ड कप की बात कर रहे थे।
मैं कुछ बोलती इससे पहले रॉकी, जो अक्सर लाइब्रेरी में दिखा पड़ता था, खड़ा हो गया,
"भारत क्रिकेट में आज हारा है तो कल जीत भीं जाएगा। खेल में अक्सर किसी एक की ही जीत होती है। कोरोना काल में दुनियाके १४० देशों को दवाइया, तकरबन १०० देशों को वैक्सीन, अफगानिस्तान को गेंहू, श्रीलंका को सस्ता तेल, वियतनाम को ब्रह्मोस देने वाला हिंदुस्तान ही था। दुनिया के सभी बड़े नेता आज सीधे गुजरात में उतरते है। क्यों पता है, मोदी साब की दुरंदेशी "वसुधैव कुटुंबकम्" की भावना से!
अब तुम बताओ, इनमे से क्या किया है तुम्हारे पाकिस्तान ने?"
"वे तो अपनी पूछ छुपाके चल दिए." अपने होठ खींचा के अमेया बोली।
"रॉकी तो सच्चा भारतीय निकला! मुझे यह समझाओ की वह भारत के पुराने दोस्त रूस के खिलाफ क्यों खड़ा हुआ?" आतुरता से घरमे इकठ्ठे हुए लोगो से एक ने पूछा।
अमेया,
"उस दिन की बात है, मैं, रॉकी, सना और साजिद क्लास के बाद घूमने गए। बर्फ की वादियों में कुछ क्षण हमने अपना जीवन जी लिया। यू तो कई दिनों से न्यूज मिल रहे थे की रूस यूक्रेन पे आक्रमण करने वाला है। पर अभी तक कुछ हुआ न था। साजिद और रॉकी इसका मजाक बना रहे थे। दूसरे विद्यार्थी यूक्रेन से निकल रहे थे। प्लेन का किराया अचानक से बढ़ने लगा। बैंक से लोग पैसे उठा रहे थे। हमने भी थोड़े बहुत पैसे ले लिए। घरका राशन भी ला दिया। पर हमे ये नही पता था की यह जंग इतनी लंबी चलेगी।
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| रूसी सेना |
रुसने यूक्रेन के अलगतावादी प्रदेश डोमबास को दो देशो मे बांट दिया। दुनिया के सबसे बड़े यूक्रेनी मालवाहक हवाई जहाज को रूस के मिसाइल ने तबाह कर दिया। यूक्रेन के तेल भंडार को भी उड़ा दिया। सारे यूक्रेन में भयावह सायरन बज रही थी। रूसी सेना कीव की ओर बढ़ रही थी। युद्ध के चौथे ही दिन रूसी सैना खारकीव पहुंच गई। हम लोग सूखे पत्ते की तरह डर से थरथरा ने लगे। अब हॉस्टल से बाहर निकलना खतरा था। घर मे रहो तो भूख से मरो और बाहर निकलें तो बुलेट से।
दो दिन से सना बीमार थी। हमारे पास दवाइया की कमी हो गई थी। सना को साजिद बहुत चाहता था, इनफैक्ट वे तो इस ईद पे शादी करने वाले थे। उस दिन सुबह साजिद दवाइया लेने छुपता हुआ निकला। सारा रास्ता रूसी सेनाने घेर रक्खा था। यूक्रेन सेना और रूसी सेना के बीच गोलियां भी चल रही थी। दवाइया का स्टोर घर से एक स्क्वेयर(जहां चार रास्ते काटते हो वह जगह) के बाद था। स्क्वेयर के दोनो तरफ गोलियां चल रही थी। एक ओर यूक्रेनी, देश बचाने शहीद होने पे तुले थे तो दूसरी ओर, रूसी सेना के सिर पे खून सवार था। जैसे तैसे साजिद स्क्वेयर को क्रॉस करने दौड़ा। उसे पता था, अगर आज मैं दवाई नहीं लाऊंगा, तो कल सना को खो दूंगा। किसको पता पता था की वह आज से दवाइया नही ला पाएगा। जैसे ही दौड़ा, रूसियन मेड़ गनने उसका सीना चीर दिया था। इसका पता हमे स्क्वेयर पे लगे कैमरे फुटेज से हुआ।
उस रात हम तीनो में से कोई सोया न था। सना की हालत ओर बिगड़ने लगी थी। उसकी बीमारी उसके आंसू तले दब रही थी। जैसे जैसे रात ढलती रही, उसकी धड़कने तेज हो रही थी। मैं और रॉकी सना के सामने अपना दर्द छुपाने का व्यर्थ प्रयास कर रहे थे। थकान से कब सो गए पता ही नही चला। अचानक रॉकी के चिल्लाने की आवाज मेरे कान में पड़ी,
| स्क्वेयर पे हुई मुठभेड़ |
"सना। सना। उठो यार... हमे लेने भारत आ रहा है। हमारे साजिद ने हमारा संदेश पहुंचा दिया है। अब सिर्फ हमे रोमानिया पहुंचना है। "
मेरी नींद अब उड़ गई थी। सना कुछ भी सुनने लायक नही थी। उसकी चेतना हमारा लोक छोड़ चुकी थी। आज हमने हमारा परिवार खो दिया था। सना और साजिद बहुत कम वक्तमे हमारा परिवार बन चुके थे। हमने सना और उसके पेरेंट्स की सारी हकीकत बता दी। रूस_यूक्रेन के इस युद्धने हमे लावारिस बना दिया था। पराए देशमे ऐसे साथी मिलना असंभव था।
रॉकीने रूस के सामने लड़ने का निश्चय कर लिया था। सुबह मुझे रोमानियाकी बॉर्डर तक छोड़ गया। भारत सरकारकी कूटनीतिक जीतकी वजह से न तो रूसी सेनाने हमे रोका, न ही यूक्रेनी। रूसी सेना मुझे रोमानिया बॉर्डर से भारत के विमानों तक सही सलामत ले लाई।
"साजिद की मौत एक हादसा था। इसमें रूसी सेना का क्या दोष?" पिताजी ने पूछा।
"हां, पर रॉकी उसे हत्या मानता था। उनकी आंखों में खून सवार था। कविता वाले अंदाजमे यह उनके आखरी शब्द थे, " मैं अब भारत नही आ सकता। मुझे अब यूक्रेन की मदद करनी होगी। मेरे भाई साजिद और सना के कत्ल का बदला लेना होगा।
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| यूक्रेनी सैनिक |
जो लौटा मैं जीवित, ब्याह रचाएंगे।
प्यारा सा अपना परिवार बसाएंगे।
साजिद और सना को गोद खिलाएंगे।
प्यारा सा अपना गांव बसाएंगे।
साजिदसना नाम से क्लिनिक बनायेंगे।"
उसने सुबह को ही यूक्रेन आर्मी का संपर्क कर लिया था। मुझे रोमानिया बॉर्डर छोड़ वह सीधा आर्मी कैंप जाने वाला था। मैंने अपने दो साथी तो खो दिए, अब रॉकी भी...।" उसकी आंखों से गंगा यमुना बहने लगी।
अमेया को घर लौटे दो दिन हो चुके थे। शाम ढल रही थी। वह टैरेस पे सूरज की ओर मुंह कर बैठी थी। उसकी चुनरी हवाओं की रकफ्तार बता रही थी। उसके बॉबी कट बाल इधर उधर खेल रहे थे। नगर अपने घर पहुंचने में उतावला था। तव उसे मां की पुकार सुनाई दी, "रॉकी का फोन आया है!" उसने झट से फोन लिया,
"कैसी हो शोना? आने में कोई दिक्कत तो नही हुई थी ना!"
अमेया से बोला न गया। रॉकी खुश लग रहा था।
"आज मेरी ट्रेनिंग खत्म हो गई है, कल से मैं फील्ड पर होऊंगा। ये मेरा आखरी कॉल है। सना साजिद बुला रहे है। कल इन दोनो के बदले दोसो को मरूंगा।"
अमेया सुनती रही। "पर...! हैलो... हैलो। रॉकी...!" फोन कट गया था।
अमेया लगातार न्यूज देख रही थी। एक दिन...दो दिन... तीन दिन...। दिन बीत रहे थे। रूसी सेना आगे बढ़ रही थी। उनका टारगेट कीव था।
एक शाम जेलेंकी का ट्वीट आया,
"This is evil that came to our land and must be destroyed," (यह दुष्टता है, जो हमारी भूमि पर आई है, और इसका खात्मा होना चाहिए।)
इस ट्वीट के साथ यूक्रेनी मीडिया में इंडियन ओरिजिन सैनिक की फोटो छपी। उसकी बहादुरी के चर्चे सारा यूक्रेन गा रहा था। नाम था "पुष्पराज ठाकुर(रॉकी)"। यूक्रेनी सेना संख्याबल में रूसी सेना से बहुत कम थी। पुष्पराज को अंदाजा आ गया की वे गोली बारूद से रूस को हरा नही पाएंगे। पुस्पराजने युद्ध को रोकने के लिए पब्लिक का साथ लिया। भारत की अहिंसावादी नीति यूक्रेन में कामियाब हो रही थी। नगर के लोग इकट्ठा होके, निहत्थे रूसी टैंकोंको आगे जाने से रोक रहे थे। उनमें कई महिलाएं भी थी। रूसी सैनिक निहत्थे पे गोली चलाने से डर रहें थे। उन्होंने कमांडर से बात कर अपनी टैंको का मुंह मोड़ लिया। यह न्यूज वर्ल्ड मीडियाका टॉकिंग पॉइंट बन चुकी थी। न्यूज एजेंसी अपनी टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में रूस को कमजोर पड़ता बताया।
इसी बीच रूस का आदेश आया। 64 किलोमीटर का लंबा मिलिट्री काफला यूक्रेन की और बढ़ निकल चुका। रूस को ओर हथियार की आवश्यकता हो रही थी। यूक्रेनी नागरिकों का बढ़ता विरोध पुतिन को लंबे युद्ध का अंदाजा दिखा रहा था। अब पुतिन को कम वक्तमे कीव जितना था। इस बीच गेरिला युद्ध पद्धति से लड़ती यूक्रेन आर्मीको रोकने हवाई हमले शुरू हो गए।
पुष्पराज मेडिकल कॉलेज में अपनी बटालियन के घायल सैनिकों का इलाज कर रहे था। शाम का वक्त था। सब लोग पब्लिक हॉस्पिटल को सुरक्षित मानते थे। युद्ध के नियम से किसी भी घायल, निहत्थे सैनिक पे कभी वार नही करते। रूस सबसे अलग निकला।
अचानक बम की बारिश शुरू हो गई। देखते ही देखते सारा कॉलेज ध्वंस हो गया। बचने वालो की संख्या बहुत ही कम थी। उनके मुताबिक, "हमे सिर्फ फाइटर प्लेन की आवाज ही सुनाई दी थी। बाद में लोगो की चीखे"।
पुष्पराज(रॉकी) भी सना और साजिद के साथ चल पड़ा। अमेया को दो दिन के बाद भारतीय एंबेसी से उसकी मौत की पुष्टि हुई। रॉकी की सभी चीजे और दस्तावेज अमेया के घर आ गए। इसे देख अमेया का लहू ठंडा हो गया। अब उसकी चीज़े ही इसके यादें बन चुकी थी। इन चीजों में अमेया और रॉकी के प्यार की निशानियां भी थी।
उन चीज़ों से एक पत्र ने अमेया का ध्यान खींचा। उसने उस पत्र को खोला और पढ़ने लगी,
"प्यारी अमेया, मेरी मौत से काफी दुखी होंगी। तुम्हारे साथ बिताए लम्हे आज मुझे मरने से अफसोस नहीं कराते। आज मैं वो बात करने जा रहा हूं, जो तुम्हें कह नही पाया।
प्यारी अमेया,
सना, हमारी दोस्त! उसे मैं तुजसे पहले जानता था। मैं सना के इतने करीब आ गया था की एकबार तो उसे प्रपोज करने का मन बना लिया था; पर वो मुसलमान और मैं हिंदू था। मैं सोच रहा था की मेरे रूढ़ीचुस्त घरवाले सना को अपनाएंगे या नही। इस बात से सना अनजान थी। मैने कभी उसे दिल की बात बताने की कोशिश नही की। इसी दौरान साजिद और तु आ गई। सना उसके मुस्लिम बिरादर साजिद के करीब आती गई। मुझे बहुत बुरा लगता था... पर तब तक साजिद भी मेरा दोस्त बन गया। फिर तू मेरे जीवन में आई ओर मैं सब कुछ भूल गया।
फिर उस रात साजिद की मौत की खबर सुन वो पूरी तरह टूट चुकी थी। उसकी बीमारी और साजिद की मौत का गम, उसे पूरी तरह ले डूबा। सना की मौत की रात जब तुम सो रही थी तब सना ने मुझे उसके मन की बात कही। वो भी मुझे उतना चाहती थी जितना मैं उसे... पर वो पाकिस्तानी मूल की थी, इस लिए उसने साजिद को चुना। उसने मेरी गोद में दम तोड़ते हुए कहा़ था, " मुझे वचन दो रॉकी! रूसी सेना से बदला लोगे। यूक्रेन की मदद करोगे"। वो मुझसे पहले सो गई, अब मैं सोने जा रहा हूं... पर उससे पहले आखरी बात : तुम अपने आपको अकेला मत समझना, "मैं तुम्हे मां कहने जल्द ही आ रहा हूं।"
ली. चंद्रसिंह जी परमार
#बापू_उवाच :
यह कहानी यूक्रेन पे हुए रूसी हमले को सटीकता से बताती है। रूस का ऑपरेशन उसके हिसाब से सच्चा था पर इस ऑपरेशन से कई निर्दोष जाने भी गई। इस गोला बारूद के बीच कही प्यार का कवल कुचला जा रहा था। इसके सभी पात्र अपनी भूमिका अच्छे से निभा रहें है। रॉकी ने सना और अमेया में से सना को पसंद किया, क्योंकि उसका आखरी शब्द रॉकी के लिए पत्थर की लकीर बन गई थी। यहां राष्ट्रीयता के साथ धर्म पे प्रकाश डाला गया है। अफगान में तालिबानी आक्रमण के बाद यूक्रेन क्राइसिस में भारत ने अपना झंडा गाड़ दिया है। भारत की कूटनीतिक जीत की वजह से यूक्रेन में फसे विदेशियों ने भी त्रिरंगे की मदद से अपनी जान बचाई थी।
जय हिंद।





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